ब्राह्मण क्यों देवता ?
कुछ आदरणीय मित्रगण कभी -कभी मजाक में या कभी जिज्ञासा में, कभी गंभीरता से एक प्रश्न करते है कि_ *ब्राम्हण को इतना सम्मान क्यों दिया जाय या दिया जाता है ?* _इस तरह के बहुत सारे प्रश्न समाज के नई पिढियो के लोगो कि भी जिज्ञासा का केंद्र बना हुवा है ।_ _*तो आइये देखते है हमारे धर्मशास्त्र क्या कहते है इस विषय में----* *शास्त्रीय मत* _पृथिव्यां यानी तीर्थानि तानी तीर्थानि सागरे ।_ _सागरे सर्वतीर्थानि पादे विप्रस्य दक्षिणे ।।_ _चैत्रमाहात्मये तीर्थानि दक्षिणे पादे वेदास्तन्मुखमाश्रिताः ।_ _सर्वांगेष्वाश्रिता देवाः पूजितास्ते तदर्चया ।।_ _अव्यक्त रूपिणो विष्णोः स्वरूपं ब्राह्मणा भुवि ।_ _नावमान्या नो विरोधा कदाचिच्छुभमिच्छता ।।_ *•अर्थात पृथ्वी में जितने भी तीर्थ हैं वह सभी समुद्र में मिलते हैं और समुद्र में जितने भी तीर्थ हैं वह सभी ब्राह्मण के दक्षिण पैर में है । चार वेद उसके मुख में हैं अंग में सभी देवता आश्रय ...