डॉ बी आर अंबेडकर

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारत के एक ऐसे नायक जिनको एक जाति विशेष की संरचना में देखा जाता है। जो कि उचित नहीं है, डॉक्टर बी आर अंबेडकर किसी एक समाज के नहीं है।डॉ बी आर अंबेडकर संपूर्ण भारत के हैं अंबेडकर कोई दलित चिंतक भर नहीं है। अंबेडकर एक राष्ट्रवादी नारीवादी,  चिंतक हैं। राष्ट्रवादी इसलिए कह रहा हूं कि अंबेडकर ने ही पहली बार आधुनिक राज्य (माडर्न स्टेट) की बात कही जोकि गांधी की रामराज्य की परिकल्पना की तुलना में सशक्त रूप से सशक्त समाज की स्थापना को विश्लेषत एवम् व्याख्याइत करता है। लेकर जो भारत में स्त्रियों को लेकर पितृसत्तात्मक समाज था उसे समाज को चुनौती सशक्त रूप से अंबेडकर द्वारा ही दी गई हिंदू कोड बिल जिसके कारण उन्हें कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा यह एक ऐसा बिल था जिसमें की हिंदू महिला उत्तराधिकार अधिनियम जिसमें  महिलाओं से संबंधित बहुत से ऐसे अधिनियम थे जिनमें महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिए जाने की बात थी लेकिन उस समय का patrichal सोसाइटी में इस बात को नकार दिया, तो यहां संक्षेप में हमारे कहने का आशय मात्र इतना है अंबेडकर को विशेष रूप से समझने की जरूरत है अगर हम अंबेडकर को किसी जाति विशेष में, किसी संरचना विशेष में किसी समूह विशेष में समझने का प्रयास करेंगे तो हमसे चूक हो जाएगी क्योंकि जाति विशेष रूप में उनको स्थापित करने से उनका सार्वभौमिक नजरिया शिथिल होने लगता है।।

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