संगठन

दो या दो से अधिक व्यक्तियों के समूह को संगठन कहा जाता है। संगठन  विकास का संकेतक और निरंतर विकास उन मुखी बने रहने का परिचायक होता है। फिर चाहे किसी भी प्रकार का संगठन क्यों न हो। संगठन विकास के लिए होता है विकास के लिए विभिन्न प्रकार की नीतियों और निर्णय पर विचार करने के लिए और उन्हें वास्तविकता में कार्यान्वित करने के लिए होता है।)
संगठन एक रचना है जो स्वयं रचनात्मकता को प्रतिबिंबित करता है जिसके अनगिनत रचनात्मक पहलू भी होते हैं।
इस पूरे संसार में चर अचर जो कुछ भी दूरदर्शी है वह सभी किसी ना किसी प्रकार के एक संगठन के रूप में है जो विभिन्न प्रकार के या किसी एक विशेष प्रकार के तत्वों के समुच्चय अर्थात संगठन है। जैसे ब्रह्मांड एक संगठन योजना और नक्षत्रों और अनगिनत वस्तुओं की। प्रत्येक योजनाओं पर अलग-अलग प्रकार के जीवों का अपना - अपना एक संगठन है। प्रत्येक जीवो के संगठन उनका अपना एक पारिवारिक संगठन भी होता है। एक पारिवारिक संगठन में आने वाले प्रत्येक जीव का शरीर स्वयं कई प्रकार के अंगो अस्थियों की रक्त कोशिकाओं और ऐसी ही कई मूलभूत इकाइयों का संगठन है। प्रत्येक जीव में पाए जाने वालेउनकी अस्थियां रक्त कोशिकाएं उनके शरीर का एक-एक सूची अंग भी कई करते हैं अनूप और माताओं को सत्यापित किया गया है। संगठन पर यदि इतनी सोच में दृष्टिकोण है से हम विचार करते हैं तो हमें यह स्पष्ट होता है कि संगठन से परे यह सृष्टि नहीं है बल्कि संपूर्ण सृष्टि ही अपने आप में एक संगठन है।
संगठन कई प्रकार के भौतिक अभौतिक, भौगोलिक, अभौगोलिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, सांप्रदायिक, ग्रामीण, शहरी, राष्ट्रीय, आंतरिक आदि ऐसे अनेकों प्रकार के संगठन होते हैं और हो सकते हैं।


Comments

  1. संगठन का आपने बहुत ही अच्छा विश्लेषण किया और इस विश्लेषण को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो गया की यही शाश्वत सत्य है कि संपूर्ण सृष्टि संगठनों का संगठन है।

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