विधानसभा में पर्ची की बरसों पुरानी परंपरा हो जाएगी समाप्त
शून्यकाल के पहले दिन से ही विधानसभा में पर्ची की बरसों पुरानी परंपरा हो जाएगी समाप्त
राजस्थान विधानसभा में वर्षों से चली आ रही पर्ची के परिपाटी गुरुवार पहले दिन के शून्यकाल से ही समाप्त हो जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी की अध्यक्षता में बुधवार को विधानसभा कार्य सलाहकार समिति की बैठक में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया की सहमति से यह निर्णय किया गया। शून्यकाल में अब तक तात्कालिक और जनहित के मुद्दों पर विधायकों को अपनी बात सदन में रखने के लिए चार पर्ची का चयन लॉटरी के आधार पर किया जाता था। चयनित पर्ची वाले विधायकों को सदन में उनके द्वारा दिए गए मुद्दों को उठाए जाने का अवसर मिल जाया करता था। इन मुद्दों पर सरकार द्वारा कार्रवाई भी की जाती थी। लेकिन अब पर्ची से मुद्दा उठाने की परंपरा समाप्त कर दी गई है। आखिर यह सब क्यों हुआ इसके पीछे क्या राज है कोई बताने को तैयार नहीं है प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया इस बात पर क्यों सहमति दी यह तो वही बता सकते हैं। लेकिन जो विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं को पर्ची के माध्यम से तत्काल सदन में उठाने का मौका लेते थे अब पर्ची के माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में नहीं रख पाएंगे। नई व्यवस्था गुरुवार से लागू होगी इसके बाद ही पता चलेगा कि विधायक पर्ची के माध्यम से अब की सदन में मुद्दा उठाने के लिए नहीं चलेगी ।
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